बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का आनंदमठ 1882 में प्रकाशित हुआ। उपन्यास में मुस्लिमों के चित्रण और धार्मिक राष्ट्रवाद को लेकर लंबे समय से आलोचना होती रही है। वहीं, 1875 में रचा गया ‘वंदे मातरम्’ बाद में आनंदमठ का हिस्सा बना और 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे कांग्रेस अधिवेशन में गाया। 1905 के स्वदेशी आंदोलन में यह स्वतंत्रता संघर्ष का प्रमुख नारा बन गया। तो सवाल है-विवादित ऐतिहासिक संदर्भों वाली रचना से निकला ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रवादी आंदोलन का इतना बड़ा प्रतीक कैसे बना? Video -@neeraj_jhaa देखिए पूरी वीडियो Molitics के यूट्यूब चैनल पर लिंक - #Anandamath #VandeMataram #IndianHistory #FreedomMovement #Nationalism
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