नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से 20 दिन की पहली नियमित पैरोल मिलने के फैसले ने एक बार फिर कानूनी प्रक्रियाओं और पीड़िता की सुरक्षा के संतुलन पर बहस छेड़ दी है। राज्य सरकार ने पैरोल का कड़ा विरोध करते हुए स्पष्ट कहा था कि रिहाई से पीड़ित महिला और उसके परिवार की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है तथा उनके फरार होने का जोखिम है। हालांकि, हाईकोर्ट ने माना कि केवल सरकारी आशंकाओं के आधार पर पैरोल नहीं रोकी जा सकती, जब तक कि कोई ठोस सबूत या पिछले उल्लंघन का रिकॉर्ड न हो। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या गंभीर अपराधों में राहत देते समय कानूनी पात्रता के साथ-साथ पीड़िता की मानसिक और शारीरिक सुरक्षा की गारंटी पूरी तरह सुनिश्चित हो पाती है? #AsaramBapu #Parole #WomenSafety #RajasthanHighCourt #Jodhpur
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