किशाऊ बांध परियोजना पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर हुए. यह प्रोजेक्ट कई दशकों से अटका हुआ था.बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने इस प्रोजेक्ट पर सहमति जताई और हस्ताक्षर किए. दरअसल, किशाऊ बांध परियोजना (Kishau Multipurpose Project) हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित करीब 15,000 करोड़ रुपये की एक बहुउद्देशीय परियोजना है. यह यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदी टोंस पर बनेगी. इस प्रोजेक्ट पर सहमति से छह राज्यों के बीच जल विवाद भी सुलझेगा. प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ बिजली बनाना नहीं, बल्कि पानी का भंडार जमा करने और सिंचाई समेत कई जरूरतों को पूरा करना है. किशाऊ तीन ऊपरी यमुना बेसिन स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में शामिल है, जिन्हें केंद्र सरकार ने नेशनल प्रोजेक्ट में शामिल किया है. किशाऊ प्रोजेक्ट से करीब 660 मेगावाट बिजली पैदा की जाएगी. बांध में पानी का भंडारण करके सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने का प्रावधान है. इससे यमुना बेसिन के संबंधित क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी. इसका क्षेत्र हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और उत्तराखंड के देहरादून जिले से जुड़ा है. किशाऊ परियोजना को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बीच संयुक्त रूप से विकसित करने की योजना है. आसान भाषा में कहें तो किशाऊ का मुख्य फायदा यह है कि बरसात में उपलब्ध पानी को बड़े पैमाने पर स्टोर करके जरूरत के समय बिजली, सिंचाई और पेयजल के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा. साथ ही, 660 मेगावाट की क्षमता से बिजली उत्पादन भी होगा. गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मध्यस्थता और पहल के तहत नरेंद्र मोदी सरकार ने कुल 10 जल विवादों का निपटारा कर लिया है. Amit Shah | Kishau Multipurpose Project | India News
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