CM Samrat Chaudhary ने Jamui पीड़िता के परिवार की पहचान उजागर की, मिलकर बाकयदा फोटो फेसबुक पर पोस्ट की। ये एक कानूनन अपराध है। यौन अपराध की पीड़िता की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती। BNS 72 उन मामलों में लागू होती है जो BNS की धाराओं 64 से 71 के अंतर्गत आते हैं। किसी व्यक्ति द्वारा पीड़िता का नाम या ऐसी कोई भी जानकारी प्रकाशित/प्रसारित करना जिससे उसकी पहचान पता चल सके, अपराध है। इसकी सजा 2 साल तक की जेल और जुर्माना है। सनद रहे कि बिहार पुलिस ने तमाम लोगों पर वीडियो शेयर कर पहचान उजागर करने के आरोप में मुकदमें किए और गिरफ्तारी भी हुई। 18 मिनट तक फोटो फेसबुक पर मौजूद रही, बाद में हटा ली गई। फेसबुक का रिकॉर्ड यही बताता है। सवाल है यहां मुख्यमंत्री ने पीड़िता के परिवार के साथ साथ फोटो किस मंशा के साथ खिंचवाई, फोटो खिंचवाई तो पोस्ट क्यों किया? पीड़िता की पहचान उजागर करने पर जो कानून आम लोगों पर लागू होता है क्या वो मुख्यमंत्री और उनके ऑफिस स्टाफ पर भी लागू होगा?
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