संरक्षण के उपदेश या लाखों लीटर तेल का जश्न? एक तरफ़ तेल बचाने और संसाधनों के संरक्षण की बातें, तो दूसरी तरफ़ जन्मदिन पर दिवाली जैसा माहौल बनाकर लाखों लीटर तेल का इस्तेमाल-क्या यह विरोधाभास नहीं है? साथ ही, देखिए न्यूज़ एंकरों की वह अनोखी होड़, जहाँ पत्रकारिता के सिद्धांतों को किनारे रखकर 'कौन कितनी वफ़ादारी दिखा सकता है' का खेल चल रहा है। क्या नेताओं का जन्मदिन अब एक बड़ा सार्वजनिक तमाशा बन चुका है? जनता के संसाधनों और प्राथमिकताओं का क्या? विडियो - @Nivedita_Shan लिंक - #MediaCircus #Satire #IndianPolitics #Journalism #NarendraModiBirthday #Journalism #MediaAnalysis
Open in BitSocialBitSocial — the social app with no off switch