बालाघाट में 30 से ज़्यादा आदिवासी बच्चों की बीमारी, कुपोषण और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के बीच मौत हो चुकी है। संवेदनहीनता का आलम यह है मासूमों की मौतें होती रहीं, लेकिन कार्रवाई सुस्त रही, सरकार सोती रही। मुख्यमंत्री जी, दीये जलाने और उत्सव मनाने से फुर्सत मिल गई हो तो ज़रा राज्य की ज़मीनी हालत भी देखिए, बीमारी, पोषण और साफ पानी की कमी और चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था नन्हें बच्चों की जान ले रही है, छात्र,बच्चे,गरीब, दलित,आदिवासी,या महिलाएं, कोई खुश नहीं। जल्द ही देश के नेता प्रतिपक्ष भी वहां जाने वाले हैं उम्मीद करते हैं कि बालाघाट के लोगों की स्थिति में सरकार सुधार करेगी। मध्य प्रदेश 📍
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