मानसून सत्र में लोकसभा की कार्यवाही बेहद कम समय चली। 19 दिन के सत्र में उत्पादकता करीब 15% रही, जबकि प्रश्नकाल भी कई बार हंगामे और स्थगन की भेंट चढ़ा। इससे महत्वपूर्ण विधायी काम और सरकार से सवाल-जवाब प्रभावित हुए। संसद की कार्यवाही पर हर मिनट होने वाला खर्च जनता के टैक्स के पैसे से आता है, ऐसे में बार-बार सदन स्थगित होने से सार्वजनिक धन और संसदीय समय दोनों पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल है-करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अगर संसद में बहस और सवाल-जवाब नहीं होंगे, तो जनता की आवाज आखिर कहां उठेगी? #Parliament #MonsoonSession #LokSabha #ParliamentProductivity #QuestionHour
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