क्या जाति के आधार पर किसी व्यक्ति के अधिकार, सम्मान और सामाजिक स्थिति तय करना न्यायसंगत हो सकता है? वर्ण व्यवस्था, जातिगत भेदभाव और मनुस्मृति में बताए गए नियमों को लेकर सवाल क्यों उठते हैं? क्या ऐसी सोच समानता और न्याय के आधुनिक सिद्धांतों के अनुरूप है? भारतीय लेखक, शिक्षाविद और दिल्ली विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त प्रोफेसर शम्सुल इस्लाम और @neeraj_jhaa के साथ पूरी बातचीत Molitics के YouTube चैनल पर देखें। लिंक - #ConstitutionOfIndia #EqualRights #HumanRights #SocialEquality
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