भागवत ने कहा कि "मुसलमानों को भारत से कोई बाहर नहीं निकाल सकता" और "जो मुसलमानों को हटाना चाहता है, वह असल में हिंदू नहीं है।" लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या ये बयान संघ के वैचारिक रुख में आए किसी वास्तविक बदलाव का संकेत हैं या फिर यह महज अंतरराष्ट्रीय मंचों के लिए एक रणनीतिक राजनीतिक नैरेटिव है? साथ ही जाने - - मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे पर हुए विरोध-प्रदर्शन और संघ की वैश्विक साख। - अल्पसंख्यकों पर RSS का ऐतिहासिक रुख बनाम भागवत के हालिया बयानों का विरोधाभास। - "अर्बन/मेंटल नक्सल" जैसे शब्दों के ज़रिए बौद्धिक आवाज़ों को दबाने की राजनीति। - भारतीय राजनीति, हिंदू धर्म और राष्ट्रवाद से जुड़े बदलते विमर्श का निष्पक्ष विश्लेषण। चर्चा - @Nivedita_Shan और @neeraj_jhaa लिंक - #MohanBhagwat #RSS #NewYork #MohanBhagwatInUSA #RSSIdeology
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