1896 में जब रवींद्रनाथ टैगोर ने कांग्रेस अधिवेशन में 'वंदे मातरम' गाया, तो उस दौर में इस गीत का सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ क्या था? स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब लाखों लोग सड़कों पर निकलते थे, तब बिना किसी जबरदस्ती के 'वंदे मातरम' और 'अल्लाहू अकबर' के नारे एक साथ गूंजते थे। जानिए राष्ट्रगीत और स्वतंत्रता आंदोलन की पूरी कहानी। चर्चा - @neeraj_jhaa और दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान के सेवानिवृत्त प्रोफेसर और लेखक शम्सुल इस्लाम (Shamshul Islam) Link - #VandeMataram #Anandmath #RabindranathTagore #FreedomMovement #IndianHistory
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