एक दशक में मीडिया और स्वतंत्र पत्रकारों पर कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। दैनिक भास्कर, न्यूज़क्लिक, बीबीसी से लेकर राना अयूब, सिद्दीक कप्पन और मोहम्मद जुबैर तक-कानूनी कार्रवाई और दबाव की घटनाओं ने प्रेस की स्वतंत्रता पर बहस तेज की है। आज सेंसरशिप सीधे नहीं, बल्कि कानून, पोर्टल और डिजिटल तंत्र के जरिए भी दिखाई दे सकती है। Video -@neeraj_jhaa देखिए पूरी वीडियो Molitics के यूट्यूब चैनल पर लिंक - #PressFreedom #MediaFreedom #FreedomOfPress #Journalism #IndependentJournalism
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