क्या देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्था यानी संसद भी जातिगत भेदभाव से अछूती है? जब देश का नीति-निर्धारण करने वाला सदन ही जातिगत बहसों और असमानता के घेरे में हो, तो क्या हम वाकई एक समतावादी समाज की उम्मीद कर सकते हैं? करमवीर बौद्ध ने भारतीय राजनीति, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की हकीकत पर खुलकर चर्चा की है। जब संसद के भीतर ऐसी बातें सामने आती हैं, तो यह समाज से भेदभाव खत्म करने के हमारे दावों पर बड़े सवाल खड़े करती है। चर्चा - @neeraj_jhaa और Karamvir Singh Boudh लिंक - #CasteDiscrimination #IndianPolitics #SocialJustice #KaramvirBaudh
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