छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 7 अगस्त को रायपुर में आयोजित ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ के फैशन शो को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकार और मीडिया जहां पूर्व माओवादी महिलाओं के इस रैंप वॉक को ‘बदलते बस्तर और पुनर्वास की सफलता’ के रूप में पेश कर रहे थे, वहीं ‘द वायर हिंदी’ (The Wire Hindi) की रिपोर्ट में शामिल महिलाओं ने इसके पीछे की सच्चाई उजागर की है। ‘द वायर’ से बातचीत में सुकमा से लाई गईं पूर्व माओवादी महिलाओं ने बताया कि उन्हें जगदलपुर में सिलाई का प्रशिक्षण (Tailoring Training) देने के नाम पर सुकमा पुनर्वास केंद्र से लाया गया था। लेकिन जगदलपुर की बजाय उन्हें सीधे रायपुर के एक होटल ले जाया गया, जहाँ मुंबई से आई टीम ने दबाव बनाकर उनसे 5 दिनों तक रैंप वॉक की ट्रेनिंग कराई और अंततः शो में उतार दिया। सुकमा पुनर्वास केंद्र की महिला पुलिसकर्मी सीमा पोयाम ने भी इसकी पुष्टि की कि महिलाओं को रैंप वॉक के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी। वहीं, दूसरी ओर ग्रामोद्योग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्यक्रम जिला प्रशासन की मंजूरी और सहमति से हुआ था। #Chhattisgarh #Raipur #Bastar #TheWire #Rehabilitation
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