मनुस्मृति पर बहस दरअसल बराबरी बनाम सामाजिक पदानुक्रम की बहस है। इसके कुछ प्रावधानों में महिलाओं और निम्न जातियों के लिए असमान सामाजिक नियम मिलते हैं। इसी व्यवस्था के विरोध में डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने 25 दिसंबर 1927 को महाड़ सत्याग्रह के दौरान मनुस्मृति का सार्वजनिक दहन किया था। इसके विपरीत, भारतीय संविधान ने समानता, स्वतंत्रता और भेदभाव-विरोध को मूल अधिकारों का आधार बनाया। सवाल है-क्या आज सामाजिक न्याय की कसौटी संविधान होना चाहिए या प्राचीन सामाजिक ग्रंथ? Video- @neeraj_jhaa देखिए पूरी वीडियो Molitics के यूट्यूब चैनल पर लिंक - #BRAmbedkar #SocialJustice #Equality #CasteSystem #Constitution
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