Plastic Note के नाम पर नया प्रयोग! कहा जा रहा है कि ₹10 और ₹20 के Polymer Notes का फील्ड ट्रायल होगा और करीब 100 करोड़ नोट बाजार में उतारे जाएंगे। सवाल यह है कि जब डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ रहा है, तब करोड़ों नए नोट छापने और पूरी करेंसी व्यवस्था बदलने पर इतना खर्च क्यों? अगर मकसद सिर्फ नोटों की उम्र बढ़ाना है, तो पहले यह बताया जाए कि पुराने नोटों की छपाई, सुरक्षा और वितरण पर होने वाला खर्च कितना है और Polymer Notes पर कुल कितना खर्च आएगा। जनता को सिर्फ नोट ज्यादा चलेंगे नहीं, पूरी लागत और पारदर्शी हिसाब चाहिए।
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