जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों को भोजन उपलब्ध कराने वाले मोहम्मद जुनैद का आरोप है कि 24 जुलाई की रात उन्हें दिल्ली पुलिस अपने साथ ले गई, पूरी रात उनकी आँखों पर पट्टी बाँधकर रखा गया और अगले दिन उनसे पूछा गया कि "इतना खाना कहाँ से आता है? फंडिंग कौन करता है?" जुनैद का दावा है कि पूछताछ के बाद उन्हें मसूरी (उत्तराखंड) में छोड़ दिया गया, जहाँ से वे स्वयं कैब लेकर दिल्ली लौटे। इस मामले ने इसलिए भी नई बहस छेड़ दी है क्योंकि CJP (Cockroach Janta Party) का कहना है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के दौरान सरकार के सामने रखी गई प्रमुख मांगों में यह भी शामिल था कि छात्रों, प्रदर्शनकारियों और आंदोलन से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बाद में पुलिस द्वारा परेशान नहीं किया जाएगा। यदि यह मांग स्वीकार की गई थी, तो जुनैद के लगाए गए आरोप कई नए सवाल खड़े करते हैं। यदि फंडिंग को लेकर संदेह था, तो क्या कानूनी नोटिस और पारदर्शी जांच का रास्ता नहीं अपनाया जा सकता था?क्या किसी व्यक्ति को बिना स्पष्ट प्रक्रिया के दूसरे राज्य तक ले जाने के आरोपों की स्वतंत्र जांच होगी।क्या पुलिस और संबंधित एजेंसियां इस मामले पर अपना आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक करेंगी? #JantarMantar #MohammadJunaid #StudentProtest #DelhiPolice #Justice
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