मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में 32 आदिवासी बच्चों की मौत का मामला सामने आया है. मलेरिया और मीज़ल्स जैसी बीमारियों से बच्चों की मौत के बाद अब इस इलाके की शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं.पूरे इलाके में एक भी प्राइमरी स्कूल नहीं है. एक स्कूल में प्राइमरी से लेकर आठवीं तक के बच्चों को साथ पढ़ाया जा रहा है। वहीं, करीब 40 किलोमीटर के दायरे में 12वीं तक की पढ़ाई के लिए सिर्फ एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल है. जब बच्चों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएँ और शिक्षा, दोनों ही इतनी दूर हों, तो उनके भविष्य की जिम्मेदारी किसकी है? क्या आदिवासी इलाकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलना उनका अधिकार नहीं है? आखिर मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार इन इलाकों की बुनियादी जरूरतों पर कब ध्यान देंगी? Video-@Harishjha97 बालाघाट की जमीनी हकीकत और शिक्षा व्यवस्था की पूरी रिपोर्ट देखिए Molitics के यूट्यूब चैनल पर । लिंक - #Balaghat #MadhyaPradesh #TribalEducation #GroundReport
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