प्राचीन भारतीय समाज में जहां महिलाओं की स्थिति और उनके अधिकारों को लेकर कई बंदिशें मौजूद थीं, वहीं जैन न्यायशास्त्र और परंपराओं ने सदियों पहले महिलाओं के आर्थिक व सामाजिक अधिकारों को मजबूती से स्थापित किया था। ऐतिहासिक संदर्भों और प्राचीन जैन ग्रंथों (जैसे वर्धमान नीति व जिनसेन कृत महापुराण) के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि जैन कानून में विधवा महिलाओं को पति और पिता—दोनों की संपत्ति में स्पष्ट अधिकार देने का विधान किया गया था। जिस दौर में सती प्रथा या समाज से निष्कासन जैसी कुप्रथाएं प्रचलन में थीं, उस समय जैन दर्शन ने विधवा महिलाओं को न केवल संपत्ति में हिस्सा देने की पैरवी की, बल्कि उन्हें स्वतंत्र रूप से व्यापार, कार्य-व्यवसाय करने और समाज में सम्मानपूर्वक जीने का पूर्ण अधिकार प्रदान किया था। Video - @neeraj_jhaa पूरी वीडियो Molitics के YouTube चैनल पर देखें। लिंक- #WomenEmpowerment #History #JainPhilosophy #SocialJustice Jainism | Women Empowerment | History | Jain Philosophy | Indian History | Social Justice | Breaking News
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