स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस्तेमाल किए गए 'दिमागी नक्सल' शब्द ने देश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। 1967 के नक्सलबाड़ी आंदोलन से शुरू हुआ 'नक्सल' शब्द और 2018 के भीमा कोरेगांव मामले के बाद चर्चा में आया 'अर्बन नक्सल' अब एक नए राजनीतिक मुहावरे के रूप में सामने आया है। पीएम मोदी ने इसे किसी कानूनी श्रेणी के बजाय वैचारिक खतरे के संदर्भ में इस्तेमाल किया था, लेकिन इसके बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग छिड़ गई। पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने खुद को 'प्राउड टू बी अ दिमागी नक्सल' कहकर तंज कसा, जिस पर बीजेपी ने तीखा पलटवार किया। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने चिदंबरम को पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह के उस बयान की याद दिलाई जिसमें उन्होंने नक्सलवाद को देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था। वहीं दूसरी तरफ, यह शब्द सोशल मीडिया पर भी तेजी से ट्रेंड करने लगा और इंस्टाग्राम पर 'Dimagi Naxal Party' नाम से बने एक व्यंग्यात्मक (satirical) पेज ने देखते ही देखते 4.5 लाख से अधिक फॉलोअर्स हासिल कर लिए। #DimagiNaxal #IndianPolitics #Trending #india
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