सालों तक राजनीतिक विमर्श संगठित अभियानों और आईटी सेल के इर्द-गिर्द घूमता रहा, लेकिन आज की डिजिटल-नेटिव पीढ़ी ने इस समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। मीम्स, व्यंग्य और त्वरित फैक्ट-चेकिंग अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली राजनीतिक टिप्पणी बन चुके हैं। भारत की Gen-Z पीढ़ी ने आखिरकार राजनीतिक नैरेटिव को कैसे अपने हाथ में ले लिया है? क्या मीम्स बदल रहे हैं भारत की राजनीति? साथ ही जाने धर्मेंद्र प्रधान का संसद में सम्मान क्यों हुआ? चर्चा - @neeraj_jhaa और @Nivedita_Shan लिंक -
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