2026 में भी आदिवासी बहुल क्षेत्रों के बच्चे मूलभूत सुविधाओं और शिक्षा के अधिकार के लिए तरस रहे हैं। गाँव के सरपंच ने अपनी लाचारगी बयां करते हुए बताया कि जनसुनवाई से लेकर मुख्यमंत्री तक को कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन कोई हल नहीं निकला। नेताओं और अधिकारियों को बार-बार समस्याओं से अवगत कराने के बावजूद स्थितियाँ जस की तस बनी हुई हैं। न पर्याप्त स्कूल हैं, न ही पीने के पानी की पूरी व्यवस्था। बार-बार पत्र देने और नेताओं को अवगत कराने पर भी क्यों नहीं हो रही सुनवाई? अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बेबस क्यों हैं जनप्रतिनिधि? आदिवासी क्षेत्रों के विकास और सरकारों के दावों पर आपकी क्या राय है? ग्राउंड रिपोर्ट - @Harishjha97 Link - #Balaghat #MadhyaPradesh #MPNews #TribalRights #EducationCrisis #RuralIndia
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