Molitics

@moliticsindia

मई 2024 में बीजेपी ने पवन सिंह को पार्टी से निष्कासित किया था। अक्टूबर 2025 में अमित शाह और जेपी नड्डा की मौजूदगी में उनकी बीजेपी में वापसी हुई और जून 2026 में बीजेपी ने उन्हें बिहार विधान परिषद के लिए उम्मीदवार बनाया। और पवन सिंह बिहार विधान परिषद (MLC) के सदस्य बने। सवाल है - क्या विधान परिषद केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मंच है, या यहां कानूनों पर गंभीर चर्चा, समीक्षा और विशेषज्ञ अनुभव का भी महत्व होना चाहिए?अगर विधान परिषद के एक सदस्य की किसी सार्वजनिक प्रस्तुति को लेकर महिलाओं की गरिमा और सार्वजनिक मर्यादा पर सवाल उठते हैं, तो क्या उस आचरण पर सवाल पूछना जरूरी नहीं है? क्या किसी जनप्रतिनिधि से यह अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए कि वह सार्वजनिक मंच पर ऐसा आचरण करे, जिससे संवैधानिक पद की गरिमा बनी रहे?बिहार जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में, महिला सम्मान और सशक्तिकरण की बात करने के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के सार्वजनिक आचरण पर भी क्या गंभीर बहस नहीं होनी चाहिए? सवाल सिर्फ पवन सिंह का नहीं, यह सवाल उस राजनीतिक व्यवस्था से भी पूछा जाना चाहिए जिसने उन्हें विधान परिषद तक पहुंचाया? video-@neeraj_jhaa #PawanSingh #BiharPolitics #BiharMLC #BiharLegislativeCouncil #WomenEmpowerment

Open in BitSocial

BitSocial — the social app with no off switch