उच्च न्यायालय द्वारा महिला सुरक्षा और यौन अपराध से जुड़े एक मामले में दी गई टिप्पणी पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। हिंदुस्तान टाइम्स और लाइव लॉ की रिपोर्ट्स के अनुसार, पटना हाईकोर्ट के उस आदेश पर सुनवाई करते हुए, जिसमें कहा गया था कि "कमरा बंद कर पीड़िता की सलवार उतारने का प्रयास करना और उसकी छाती दबाना बलात्कार के प्रयास (Attempt to Rape - Section 376/511 IPC) की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि यह केवल महिला की लज्जा भंग करना (Outraging Modesty - Section 354 IPC) है", भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने गहरी नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की इस न्यायिक व्याख्या और टिप्पणियों को आपत्तिजनक करार देते हुए कहा कि यौन अपराधों के मामलों में इस प्रकार की असंवेदनशील व्याख्या न्यायिक मर्यादा के खिलाफ है। शीर्ष अदालत ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और आरोपी को नोटिस जारी किया है और विवादित हिस्से पर रोक लगा दी है। #SupremeCourt #PatnaHighCourt #CJISuryakant #LegalNews #WomenSafety
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