महाराष्ट्र परिवहन विभाग द्वारा 12 अगस्त 2026 के नोटिफिकेशन के तहत ऑटो, कैब और ऐप-बेस्ड चालकों के लिए 'कार्यात्मक (Functional) मराठी' अनिवार्य किए जाने और 4,000 से अधिक चालकों को नोटिस जारी होने के बाद राज्य में बड़ा कानूनी व राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। चालकों के विरोध और बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सख्त कार्रवाई पर रोक लगाते हुए चालकों को मराठी सीखने के लिए 1 साल का समय देने और स्टडी मटेरियल उपलब्ध कराने की घोषणा की है। बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिका (PIL) में चालकों ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 (Motor Vehicles Act) का हवाला देते हुए इस नियम को संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 19 (व्यापार की स्वतंत्रता) और 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन बताया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि केंद्रीय कानून में लाइसेंस या बैच रद्द करने के लिए भाषाई योग्यता की कोई कानूनी शर्त नहीं है। वहीं तमिलनाडु में 1965 के हिंदी विरोधी आंदोलन और NEET परीक्षा में क्षेत्रीय भाषा अनुवाद विवाद से लेकर कर्नाटक में कन्नड़ बोर्ड विवादों तक, भारत में भाषा, अस्मिता और रोज़गार के बीच संतुलन का मुद्दा एक बार फिर देशव्यापी बहस के केंद्र में आ गया है। #MaharashtraPolitics #DevendraFadnavis #MarathiLanguage
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