एक महिला को सिर्फ इसलिए नौकरी नहीं मिली क्योंकि वह महिला थी। मामला 1989 का है। करनाल के इंडियन ऑयल LPG प्लांट में ₹34 प्रतिदिन की दैनिक मजदूरी वाली नौकरी के लिए सुमित्रा समेत 49 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट हुए थे। इंटरव्यू और सिफारिश के बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं मिली। आरोप था कि LPG सिलेंडर उठाने और पुरुषों के साथ नाइट शिफ्ट में काम करने के आधार पर उन्हें महिला होने की वजह से अयोग्य माना गया। इसके बाद शुरू हुई करीब 36 साल लंबी कानूनी लड़ाई। अब सुप्रीम कोर्ट ने नौकरी से वंचित किए जाने को लैंगिक भेदभाव माना और ₹12 लाख मुआवजे का आदेश दिया। हालांकि, उम्र बढ़ जाने के कारण अब नौकरी देना संभव नहीं था। #SumitraCase #IndianOil #GenderDiscrimination #WomenRights #GenderEquality
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