“मुझे मुआवज़ा नहीं चाहिए, बल्कि अपने दिवंगत पिता की याद में गरीब बच्चों के लिए एक स्कूल चाहिए।” जब हमने अब्दुल के परिवार के लिए मुआवज़ा दिलाने की बात कही, तो उन्होंने आशुतोष रंका से यही कहा। नफरत की राजनीति के चलते अब्दुल ने अपने पिता को खो दिया। फिर भी अब्दुल अपने इलाके के स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
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