नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और फ्लैश फ्लड के बीच ईशा फाउंडेशन द्वारा आयोजित 'कैलाश मानसरोवर यात्रा' (Sacred Walks) गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। सद्गुरु जग्गी वासुदेव द्वारा की गई पुष्टि के मुताबिक, नेपाल-चीन सीमा के काठमांडू-रसुवागढ़ी-केरुंग रूट से लौट रहे 77 यात्री (53 भारतीय नागरिकों सहित) अब भी लापता हैं। इस हादसे के बाद ईशा फाउंडेशन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि भारत सरकार द्वारा संचालित सुरक्षित और पारंपरिक रास्तों (लिपुलेख और नाथुला) को छोड़कर 14 दिनों के छोटे और व्यावसायिक काठमांडू-रसुवागढ़ी मार्ग को क्यों चुना गया, जो पहले भी भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आ चुका था? एक गैर-लाभकारी आध्यात्मिक संस्था होने के बावजूद कमर्शियल टूर ऑपरेटर की तरह यात्राएं आयोजित करने और जोखिम मूल्यांकन (Risk Assessment) में लापरवाही को लेकर अब बहस छिड़ गई है। #IshaFoundation #Sadhguru #KailashMansarovar #NepalFloods #Nepal
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