विश्वविद्यालय में दिए गए एक भाषण में पौराणिक कथाओं को इतिहास और विज्ञान से जोड़ने वाले बयानों पर बहस छिड़ी है। द्रौपदी को नारीवाद और गणेश को प्लास्टिक सर्जरी का उदाहरण बताए जाने जैसे दावों पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल है -आधुनिक और वैज्ञानिक सोच के दौर में ऐसी बातें करना कितना उचित है? क्या विश्वविद्यालयों में आस्था और मिथक से ज्यादा तर्क, शोध और प्रमाण को प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए? Video -@neeraj_jhaa देखिए पूरी वीडियो Molitics के यूट्यूब चैनल पर लिंक - #Mythology #ScientificTemper #CriticalThinking #AcademicDebate #HigherEducation
Open in BitSocialBitSocial — the social app with no off switch