"क्या फर्क पड़ता है राजा कौरव हो या पांडव, जनता तो बेचारी द्रौपदी है..." संविधान की प्रस्तावना में 'अवसर की समानता' की बात कही गई है, लेकिन आज स्थिति यह है कि राजनीतिक परिवारों के लिए अवसर ही अवसर हैं और आम युवा के हिस्से सिर्फ बेरोज़गारी और संघर्ष है! झारखंड में बेरोज़गारी दर 8% से बढ़कर 18% तक पहुँच चुकी है। आखिर कब तक आम युवा यूँ ही पिसता रहेगा? Video - @Nivedita_Shan लिंक - #YouthProtest #JharkhandNews #StudentsVoice #Unemployment
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