आज़ादी के 79 साल पूरे होने का जश्न और 'अमृतकाल' की गुलाबी तस्वीरें अपनी जगह हैं, लेकिन ज़रा ज़मीन पर उतरकर देखिए, हकीकत मुंह चिढ़ाती नज़र आती है। क्या हम वाकई अपराध, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक कुरीतियों से आज़ाद हो पाए हैं या सिर्फ नारों का पैकेट बदल गया है? ग्लोबल इंडेक्स में पिछड़ती रैंकिंग से लेकर महिलाओं के खिलाफ दर्ज 4.41 लाख से अधिक मामलों तक, आंकड़े विकास के हर दावे पर सवाल खड़े करते हैं। जहां बच्चे नदी पर बने कंक्रीट के खंभों पर जान हथेली पर रखकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं, वहीं मिड-डे मील में 'पानी वाला दूध' और 'फटे पन्नों' पर खाना परोसा जा रहा है। हद तो यह है कि 12,000 करोड़ की लागत से बनी चमचमाती सड़कें पहली ही बारिश में धंस रही हैं और खुले गड्ढे मासूमों की जान ले रहे हैं। #79thIndependenceDay #AmritKaal #EducationSystem #WomenSafety
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