'सत्यार्थ प्रकाश' में स्वामी दयानंद ने तर्क दिया था कि ईश्वर सर्वव्यापक है, उसे किसी एक जड़ मूर्ति में सीमित नहीं माना जा सकता। वेदों में मूर्ति पूजा, प्राण प्रतिष्ठा या देवताओं के आह्वान का कोई प्रमाण नहीं मिलता। उनका मानना था कि पौराणिक काल और अन्य धार्मिक प्रतिस्पर्धाओं के कारण यह व्यवस्था विकसित हुई। क्या आज का हिंदू धर्म और मूर्ति पूजा केवल 1,000 साल पुरानी है? वेदों में मूर्ति पूजा और प्राण प्रतिष्ठा का कोई उल्लेख क्यों नहीं है? चर्चा - @neeraj_jhaa और दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान के सेवानिवृत्त प्रोफेसर और लेखक शम्सुल इस्लाम (Shamshul Islam) Link - #SwamiDayanand #VedicWisdom #SatyarthPrakash #SanatanVichar #Philosophy
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