-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने उत्तरी कश्मीर (कुपवाड़ा) के शोधकर्ता और स्कॉलर शफत मकबूल वानी के खिलाफ लगाए गए पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत निरोधात्मक हिरासत (Preventive Detention) आदेश को रद्द करते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल संवेदनशील या विवादित शीर्षकों वाली किताबें पास में होने से कोई व्यक्ति अपराधी या राष्ट्रविरोधी साबित नहीं हो जाता। न्यायमूर्ति मोक्षा खजुरिया काज़मी की पीठ ने सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि एक अकादमिक स्कॉलर होने के नाते अध्ययन और बौद्धिक शोध के लिए विविध प्रकार का साहित्य रखना स्वाभाविक है। कोर्ट ने प्रशासन द्वारा वानी के पिता के पूर्व-उग्रवादी संबंधों और किताबों के आधार पर उन्हें अलगाववादी विचारधारा का मानने को "शक्तियों का अंधाधुंध इस्तेमाल" करार दिया। पीठ ने कहा कि पुलिस यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही कि याचिकाकर्ता किसी विध्वंसक या राष्ट्रविरोधी गतिविधि में शामिल था। #JKHighCourt #KashmirNews #ShafatMaqbool #PSA #FreedomOfExpression
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