1923 में आई वी.डी. सावरकर की किताब 'हिंदुत्व' में साझा रक्त और संस्कृति के बंधन में बंधी आबादी का ज़िक्र करते हुए इसे एक बड़ी ताकत के रूप में देखा गया था। वहीं, 1939 में आई एम.एस. गोलवलकर की किताब 'वी ऑर अवर नेशनहुड डिफाइंड' में हिंदू राष्ट्र की जागृति की तुलना सोए हुए शेर के जागने से की गई थी। गोलवलकर की इसी किताब में नाजी जर्मनी की नीतियों का ज़िक्र करते हुए भारत के अल्पसंख्यकों के लिए हिंदू संस्कृति में पूरी तरह घुल-मिल जाने या बिना नागरिक अधिकारों के रहने की शर्त की बात कही गई थी। Video By- @neeraj_jhaa पूरी वीडियो Molitics के YouTube चैनल पर देखें। लिंक- #VDSavarkar #MSGolwalkar #Hindutva #History #IndianPolitics VD Savarkar | MS Golwalkar | Hindutva | History | Indian Politics
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