कर्नाटक के मशहूर संगीतकार टी.एम. कृष्णा की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि धार्मिक कारणों से 'वंदे मातरम' न गाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण कानून में किए गए संशोधनों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने ऐतिहासिक 'बिजो इमैनुअल' (Bijoe Emmanuel) मामले का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता व व्यक्तिगत विश्वास का अधिकार सुरक्षित है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय गीत का सम्मान बनाए रखना है, लेकिन धार्मिक आस्था के आधार पर इसे न गाने वाले किसी भी नागरिक को आपराधिक मुकदमे या सजा का सामना नहीं करना चाहिए। #SupremeCourt #VandeMataram #TMKrishna #ConstitutionalRights #FreedomOfExpression
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