नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने एस्सेल/ज़ी ग्रुप (Essel Group) के संस्थापक डॉ. सुभाष चंद्रा के पर्सनल इंसॉल्वेंसी (व्यक्तिगत दिवालियापन) मामले में एक बड़ा और विवादित फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने 22,006.57 करोड़ रुपये के कुल स्वीकृत दावों (Admitted Claims) को निपटाने के लिए सुभाष चंद्रा की ओर से पेश किए गए महज 6.25 करोड़ रुपये के रीपेमेंट प्लान (Repayment Plan) को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का मतलब है कि कर्जदाता बैंकों को अपने दावों का लगभग 99.97% नुकसान (Haircut) सहना पड़ेगा। LIC हाउसिंग फाइनेंस, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया जैसे प्रमुख लेंडर्स ने इस प्लान को "गैर-व्यावहारिक और अनैतिक" बताते हुए इसके खिलाफ मतदान किया था, और अब वे इस आदेश के खिलाफ NCLAT जाने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर, सुभाष चंद्रा और सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह 22,000 करोड़ रुपये का निजी कर्ज नहीं था, बल्कि एस्सेल समूह की कंपनियों के लिए दी गई पर्सनल गारंटी का मामला था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मूल कर्जदार कंपनियां अब भी अपनी देनदारियों के लिए जिम्मेदार हैं और वे अलग से बैंकों का पैसा चुकाएंगी। #SubhashChandra #NCLT #ZeeNews #EsselGroup #IBC
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