News Pinch

@thenewspinch

Bastar के पोर-पोर में नक्सल का खौफ था. आलम ये था कि बिना माओवादी पार्टी की इजाज़त के बगैर कहीं जाना-आना मना था. ज़हनी और ज़मीनी तौर पर किसी कैद से कम नहीं! कब, कहां, कौन सी गोली पर आम आदिवासियों की मौत लिखी हो, किसी को नहीं पता था. मगर बस्तर की तस्वीर अब बदली है. कई जवानों की शहादत और अनेकों आदिवासियों के सपने खपे, तब ये दिन आया. बस्तर डॉक्यूमेंट्री को आपने बहुत प्यार दिया है. अब तक लगभग 14 लाख लोगों ने इसे देखा है. हमें Bastar Documentary तैयार करने में 8 महीने लग गए. दिसंबर 2025 में जब जंगल में गोलियाँ चल रही थीं,उसी दौरान हम ये शूट कर रहे थे. बहुत जतन,तप,मेहनत और जोखिम के साथ ये पूरी कहानी आपके लिए लेकर आए हैं. उम्मीद करते हैं बस्तर का सारा सच दिखाने की कोशिश में हम कामयाब होंगे. आप न सिर्फ खुद देखेंगे,बल्कि अपने दोस्तों,परिवारजनों को भी दिखाएँगे. जितने अधिक लोगों तक ये डॉक्यूमेंट्री पहुंचेगी,हमारा हौसला ऐसे काम करने के लिए उतना ही बढ़ता रहेगा. ज़रूर देखिए. Bastar: The Last Battle of Naxal. @Abhinavpinch

Open in BitSocial

BitSocial — the social app with no off switch