बालाघाट में 28 से ज़्यादा बच्चों की मौत हो गई। मलेरिया, निमोनिया, टाइफाइड जैसी बीमारियों से! 2026 में हम डिजिटल इंडिया, 5G, चाँद-मंगल और विकसित भारत की बातें कर रहे हैं और दूसरी तरफ़ हमारे आदिवासी इलाकों में बच्चे मलेरिया से मर रहे हैं। काजल भी इन्हीं बच्चों में से एक थी। 10 साल की बच्ची, पाँचवीं कक्षा में पढ़ती थी। जिस उम्र में उसके हाथ में किताब और कलम होनी चाहिए थी, आज उसी बच्ची की चिता जल रही है। सरकार सोई हुई है 🥺
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