दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के तहत अदालतों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पेश करने के लिए गरीब और जरूरतमंदों को मुफ्त फोरेंसिक विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने वकीलों जीशान इखलाक और अमन भिड़े की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि फोरेंसिक विशेषज्ञ के अभाव में साक्ष्य न रख पाना न्याय तक पहुंच के मौलिक अधिकार को प्रभावित करता है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नए कानूनों के तहत इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के लिए एक्सपर्ट सर्टिफिकेट जरूरी है, जिसे आर्थिक रूप से कमजोर लोग अफोर्ड नहीं कर पाते। अदालत ने NALSA से इस संबंध में एक प्रभावी योजना की संभावना तलाशने को कहा है। #DelhiHighCourt #NALSA #LegalAid #ForensicAssistance #JusticeForEveryone
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