IT एक्ट और धारा 79(3)(b) का हवाला देकर भारत में Molitics की 20 से अधिक रिपोर्ट्स और पोस्ट्स को ब्लॉक कर दिया गया है। हटाई गई पोस्ट्स में जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन, संसद मार्च पर लाठीचार्ज, शिक्षा संकट, पेपर लीक, यूपी सरकार के विज्ञापन खर्च और काज़ीरंगा इको-सेंसिटिव ज़ोन जैसे जनहित के मुद्दों की कवरेज शामिल थी। ये ब्लॉकिंग निर्देश सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के 'सहयोग' पोर्टल के जरिए जारी हुए हैं। मेटा (Meta) का API इस पोर्टल से जुड़े होने के कारण बिना किसी इंसानी समीक्षा (Human Review) के महज 3 घंटे के भीतर पोस्ट्स अपने आप गायब कर दी गईं। आंकड़े बताते हैं कि 5 महीनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को करीब 1.95 लाख ब्लॉकिंग ऑर्डर मिले हैं, यानी हर 68 सेकंड में एक पोस्ट की विदाई! अब सवाल यह उठना तो लाजिमी है कि अगर निष्पक्ष पत्रकारिता और सरकारी नीतियों पर सवाल पूछने का अधिकार ही ब्लॉक कर दिया जाएगा, तो लोकतंत्र में जनता की आवाज आखिर कहाँ दर्ज होगी...??
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