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@thenewspinch

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेटियों को दहेज उत्पीड़न के बावजूद ससुराल वापस भेजने वाले पेरेंट्स को फटकार लगाई. कोर्ट दहेज उत्पीड़न के 27 साल पुराने मामले में सुनवाई कर रहा था. इस दौरान जस्टिस मनीष माथुर ने कहा कि भारत में शादी के बाद बेटी की भलाई से पल्ला झाड़ लेना और उसे बोझ समझना दुर्भाग्यपूर्ण रूप से आम हो गया है. कोर्ट ने 27 साल पुराने दहेज हत्या मामले में दो ससुराल वालों की सज़ा बरकरार रखी, जबकि पति को बरी कर दिया. जस्टिस मनीष माथुर ने कहा कि - 'दुर्भाग्य से, भारत में यह एक आम प्रथा है कि बेटी को माता-पिता पर बोझ समझा जाता है. शादी होते ही माता-पिता उसकी जिम्मेदारी से अपना पल्ला झाड़ लेते हैं. उसके बाद उसकी भलाई की परवाह नहीं करते. दहेज की मांग के कारण परेशान की जाने वाली या मारी जाने वाली बहुओं के माता-पिता का ऐसा व्यवहार असल में उन बहुओं के ससुराल वालों के अपराध में मदद करने जैसा है.' #AllahabadHighCourt | Allahabad High Court | UP News

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