धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कोई अनोखी बात नहीं है—जब भी चौतरफा किरकिरी होती है, हमारे नेता नैतिक जिम्मेदारी का बहाना बनाकर कुर्सी छोड़ देते हैं। 1956 में अरियालूर रेल हादसे के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने इस्तीफा देकर इस सिलसिले की शुरुआत की थी, जिसे 1999 में गैसल हादसे के बाद नीतीश कुमार ने भी दोहराया। 2010 में 2G घोटाले का शोर बढ़ा तो ए. राजा को भी किनारे होना पड़ा। अब 2026 में NEET धांधली और CJP के छात्रों के भारी हंगामे के बाद धर्मेंद्र प्रधान को भी अचानक 'नैतिकता' याद आ गई। असल सवाल यह है कि मंत्री बदलने से क्या व्यवस्था की दीमक खत्म हो जाएगी या यह सिर्फ गुस्सा शांत करने का पैचवर्क है? #Jantarmantar #DharmendraPradhan #cjp #LalBahadurShastri #NitishKumar
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