अच्छा है कि RSS इतिहास में न झांके। क्योंकि इतिहास में जायेंगे तो RSS को आज़ादी के आंदोलन का गद्दार ही पाएंगे। तिरंगा से लेकर वंदे मातरम तक - RSS ने हर उस चीज़ से दूरी बनाई हुई थी, जिससे देश के लोग एक हो रहे थे। जो स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा बन रही थी। वंदे मातरम पहली बार गया गया 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन के दौरान! गाया था रविन्द्रनाथ टैगोर ने और अधिवेशन की अध्यक्षता की थी रहीमतुल्ला एम सयानी ने। 1905 में आधिकारिक रूप से अपनाया। कहा कि अखिल भारतीय अवसरों पर गया जाएगा। 1925 में RSS के गठन के बाद से आपको किसी दस्तावेज में, इनके बड़े नेताओं जैसे हेडगेवार, गोलवलकर की चिट्ठियों में औपचारिक तौर पर कहीं वंदे मातरम नहीं दिखेगा। Video -@neeraj_jhaa
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