देश की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी प्राथमिकताओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राजस्थान के जालौर में जब छात्रों ने ताला लगाया, तब जाकर शिक्षक मिले; यूपी के फतेहपुर में पीने के पानी, बिजली और पंखों के लिए छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़ा; वहीं बिहार में प्रदर्शनकारियों पर पुलिसिया कार्रवाई का खौफ देखने को मिला। हैरानी की बात यह है कि देश के कुल ₹53.47 लाख करोड़ के केंद्रीय बजट (2026–27) में से शिक्षा मंत्रालय के हिस्से केवल ₹1.39 लाख करोड़ (महज 2.6%) ही आया। एक तरफ डिजिटल इंडिया और आधुनिक शिक्षा के बड़े-बड़े दावे हैं, तो दूसरी तरफ छात्र बुनियादी सुविधाओं के लिए आंदोलन करने को मजबूर हैं। #EducationSystem #bjp #PaperLeak #Budget2026 #IndianEducation
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