21वीं सदी के भारत और 'विश्वगुरु' के दावों के बीच मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से एक बेहद दर्दनाक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। बिरसा ब्लॉक के बैगा आदिवासी बहुल गांवों में मलेरिया, खसरा (Measles), एनीमिया और गंभीर कुपोषण के चलते 29 मासूम बच्चों की जान चली गई। सरकारी पोषण रिकॉर्ड बताते हैं कि क्षेत्र के 28 आंगनवाड़ी केंद्रों में जांचे गए 1,149 बच्चों में से 213 बच्चे कुपोषित और 18 बच्चे अति-कुपोषित (Severely Underweight) पाए गए। जब बच्चे दम तोड़ रहे थे, तब स्वास्थ्य महकमा सोया हुआ था। 3 बच्चों की मौत के बाद विभाग को खबर लगी और मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में वैक्सीनेशन व मलेरिया अधिकारियों को हटाया गया। मामले के तूल पकड़ते ही मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुआवजा घोषित किया, तो वहीं कांग्रेस ने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे, स्वतंत्र जांच और गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) की FIR दर्ज करने की मांग को लेकर सीएमएचओ दफ्तर का घेराव किया। सवाल यह है कि अगर यह क्षेत्र पहले से कुपोषण और बीमारियों से संवेदनशील था, तो समय पर टीकाकरण, साफ पानी और इलाज क्यों नहीं पहुंचा? क्या सिस्टम की इस आपराधिक लापरवाही की जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए? #MadhyaPradesh #HealthSystemFailure #ChildHealthcare #MohanYadav
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