Molitics

@moliticsindia

दिल्ली दंगा साजिश मामले में बिना ट्रायल 6 साल से अधिक समय से सलाखों के पीछे बंद पूर्व JNU छात्र उमर खालिद की कस्टडी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस दीपक गुप्ता (सेवानिवृत्त) ने 'द ट्रिब्यून' (The Tribune) के अपने स्तम्भ "The True Meaning of Freedom" में भारतीय न्यायिक प्रक्रिया पर तीखा हमला बोला है। जस्टिस गुप्ता ने पूछा कि बिना आरोप तय हुए वर्षों तक कस्टडी में रखे गए आरोपी के मौलिक अधिकारों, स्वतंत्रता और 'शीघ्र सुनवाई' (Right to Speedy Trial) का क्या हुआ? जस्टिस गुप्ता ने देश की आपराधिक न्याय प्रणाली पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि कानूनी सिद्धांत के मुताबिक "जमानत नियम है और जेल अपवाद" (Bail is the rule, Jail is the exception), लेकिन आज व्यवहार में यह पूरी तरह उलट चुका है। देश की जेलों में बंद करीब 75% कैदी अंडरट्रायल (विचारणाधीन) हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुकदमा शुरू हुए बिना वर्षों तक जेल में रखना यह दर्शाता है कि अब "कानूनी प्रक्रिया ही खुद में एक सजा" (The process has become the punishment) बन गई है। इसके साथ ही उन्होंने उल्लेख किया कि शीर्ष अदालत ने खुद अपने बाद के एक फैसले में उमर खालिद मामले में दिए गए पूर्व आदेशों की वैधानिकता पर सवाल खड़े किए हैं। #UmarKhalid #JusticeDeepakGupta #TheTribune #SupremeCourt #UndertrialPrisoners

Open in BitSocial

BitSocial — the social app with no off switch