"जंतर-मंतर पर बैठे युवाओं में पंचर लगाने वाले ज़्यादा थे। वे सब पंचर लगाने वालों की औलादें थीं, इसलिए मोदी को गाली दे रहे थे।" यह बयान भाजपा नेता रमेश बिधूड़ी का है, जो अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। देश के युवाओं के आंदोलन पर इस तरह की टिप्पणी कई सवाल खड़े करती है। क्या अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराने वाले युवाओं के लिए ऐसी भाषा उचित है? क्या लोकतांत्रिक असहमति का जवाब अपमानजनक टिप्पणियों से दिया जाना चाहिए, या उनकी बात सुनकर समाधान तलाशना चाहिए? #RameshBidhuri #BJP #JantarMantar #StudentProtest #YouthProtest
Open in BitSocialBitSocial — the social app with no off switch