सामाजिक समानता और अधिकारों की लड़ाई को लेकर देश में एक बार फिर संविधान की सर्वोच्चता की बात दोहराई गई है। मनुस्मृति जैसी रूढ़िवादी सोच का विरोध करते हुए यह साफ कहा गया कि दलितों, वंचितों और महिलाओं का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि इनके बिना देश और समाज की कल्पना भी अधूरी है। इसके साथ ही पितृसत्तात्मक सोच पर प्रहार करते हुए कहा गया कि महिला की पहचान सिर्फ पिता, पति या पुत्र तक सीमित नहीं है, वह इससे परे अपनी अलग पहचान और मुकाम बनाने में सक्षम है। भारत सिर्फ और सिर्फ समानता देने वाले बाबा साहेब के संविधान से ही चलेगा। Ground Report- @neeraj_jhaa पूरी वीडियो Molitics के YouTube चैनल पर देखें। लिंक - #SamvidhanBachao #DalitRights #WomenEmpowerment #SocialJustice #IndianConstitution
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