यौन अपराधों और बलात्कार के प्रयास (Attempt to Rape) के कानूनी मानकों पर झारखंड उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी महिला के घर में घुसना, उसके कपड़े उठाना या उसे पकड़ना अपने आप में IPC की धारा 376/511 के तहत बलात्कार के प्रयास का अपराध गठित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। 1999 के एक मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने कहा कि बलात्कार के प्रयास की सजा तय करने के लिए आरोपी की ओर से ऐसा कोई स्पष्ट और प्रत्यक्ष कदम (Overt Act) होना चाहिए, जो सीधे तौर पर अपराध को अंजाम देने के बिल्कुल करीब हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आपराधिक बल का प्रयोग या महिला की गरिमा भंग करने का कृत्य बलात्कार के प्रयास की कानूनी श्रेणी में नहीं आता। इस कानूनी व्याख्या के साथ हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाए गए 4 साल के सश्रम कारावास के फैसले को बदलते हुए आरोपी को धारा 376/511 से बरी कर दिया और मामले को महिला की गरिमा भंग करने (IPC 354) का अपराध मानते हुए सजा को आरोपी द्वारा पहले ही काटी जा चुकी 8 महीने की हिरासत अवधि तक सीमित कर दिया। #JharkhandHighCourt #LegalUpdate #HighCourtVerdict #IPC376 #Attempt
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