क्या सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलना ही अब 'नक्सलवाद' बन चुका है? जब सवाल पूछना ही 'नक्सलवाद' कहलाएगा, तो लोग कहेंगे-"हाँ, हम हैं!" जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं से लेकर आम नागरिकों तक, जो भी सरकार से सवाल पूछता है, उस पर एक नया टैग लगा दिया जाता है। जब असहमति (Dissent) और क्रिटिकल थिंकिंग (Critical Thinking) को ही अपराध माना जाने लगेगा, तो जनता में यही संदेश जाएगा कि सवाल उठाना ही नक्सलवाद है। इस वीडियो में जानिए कैसे किसी भी विचार को खारिज करने के लिए 'लेबल' का इस्तेमाल किया जा रहा है और क्या लोकतंत्र बिना सवाल पूछे चल सकता है? चर्चा - @neeraj_jhaa और @DrPankajSpeaks लिंक -
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