एक तरफ सरकारी नौकरियाँ कम हो रही हैं और प्राइवेट कंपनियाँ रोज़गार का मुख्य केंद्र बन रही हैं, वहीं यह सवाल खड़ा होता है—जब ज़्यादातर नौकरियाँ प्राइवेट सेक्टर में हों, तो सामाजिक प्रतिनिधित्व (Social Representation) का क्या होगा? क्या सदियों के भेदभाव और असमानता को पाटने के लिए प्राइवेट कंपनियों में भी आरक्षण ज़रूरी है? या फिर प्राइवेट सेक्टर को पूरी तरह से मेरिट (योग्यता) पर आधारित रहना चाहिए? और क्या 'मेरिट' को उन सामाजिक और आर्थिक हालातों से अलग किया जा सकता है जिनमें कोई व्यक्ति बड़ा होता है? इन सभी पहलुओं, तर्कों और ऐतिहासिक कारणों को समझने के लिए पूरा एपिसोड ज़रूर देखें। चर्चा - @hemannt_yadava और @raghavindia1 लिंक - #PrivateSectorReservation #SocialJustice #CasteAndMerit #IndianEconomy #Equality #Employment
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